महापौर चुनाव में पार्टी के बजाय दो चेहरों के बीच अंतिम लड़ाई पहुंची !
उज्जैन।नगर निगम चुनाव का प्रचार का शोर आज शाम थम गया है, इसी के साथ अब सबकी निगाहें मतदान के दिन पर टिक गई है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस प्रत्याशी की महापौर की लड़ाई अब जनता के बीच स्पष्ट रूप से खाई की तरह सामने आ गई है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी मुकेश टटवाल मिलनसार ईमानदार को पार्टी ने टिकट देकर एक बड़ा संदेश दिया है कि पार्टी में एक छोटे से कार्यकर्ता को भी महापौर जैसे बड़े पद पर चुनाव लड़ाया जा सकता है। जबकि कांग्रेस पार्टी ने एक स्वच्छ छवि के जुझारू व्यक्तित्व के धनी जिसका पूरे शहर, जिले, एवं प्रदेश में जिसकी पहचान स्थापित हो चुकी है ऐसे शख्स को चुनाव मैदान में उतारकर बीजेपी प्रत्याशी के मुकाबले प्रारंभिक रूप से पहचान के टोटे से मुक्त होकर अपरोक्ष रूप से पूरी तरह छवि को उन्होंने हथिया लिया है। अब देखना होगा कि चुनाव नतीजों पर इसका कितना प्रभाव पड़ता हे या फिर राजनीतिक पंडितों के यह सारे कयास धूलधूसरित हो जाते हैं।
नगर निगम चुनाव अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गए हैं। यहां से बाजी किसी के हाथ भी जा सकती है। कांग्रेस पार्टी ने अपने सारे दांव पेच चुनाव में झोंक दिए हैं, उनके सारे बुजुर्ग नेता भी सड़कों पर महापौर प्रत्याशी के लिए विजय बनाने निकल चुके हैं i इसका असर भी चुनाव मैदान में स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है, इसके अलावा कांग्रेस के बागी प्रत्याशी थे उन्हें भी चुनाव मैदान से बिठाकर उस वार्ड से दूर कर महापौर के पक्ष में काम करने के लिए एक नई टीम गठित की है। जो सड़कों पर निकल कर उन्हें विजय बनाने के लिए निरंतर सक्रिय प्रयास कर रही है। हमेशा कांग्रेस पार्टी गुटबाजी से जूझती हुई नजर आती थी, परंतु इस बार महेश परमार के चुंबकीय नेतृत्व ने उन्हें सबको एकजुट कर विशाल जाजम पर बिठा दिया है जो चुनाव में काफी लंबे समय बाद कांग्रेस की राजनीति में देखने को मिल रहा है।
इधर भारतीय जनता पार्टी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक से संबद्ध अनेक संगठन चुनावी जमीन पर पूरी तरह उतर चुके हैं। परंतु उसके सामने सबसे बड़ी मुसीबत पार्टी के बागी उम्मीदवार जो विभिन्न वार्डों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के सरदर्द बने हुए वह सबसे बड़ी चुनौती के रूप में मुंह बाए खड़ी है। अगर पार्टी ने ऐसे लोगों पर चुनाव मैदान से नहीं हटाया तो वह भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशियों के बूंदे बैठ जाएंगे।
इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के अधिकांश वार्डो में पार्षद प्रत्याशी खड़े हुए हैं, वह अपने आंतरिक संकट से जूझ रहे है। इस वजह से वह अपने महापौर प्रत्याशी के लिए वोट मांगने की बजाय उनके सामने उनकी जीत की चुनौती से वह खुद घिर चुके हैं। हालांकि विश्व में सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी हमेशा से संकट के समय निखर कर सामने आती है। इसलिए उसके सामने महापौर चुनाव एक कड़ी अग्नि परीक्षा के रूप में है सामने है। इस चुनौती से वह कैसे पार पाएगी इसका पता तो चुनाव नतीजे आने के बाद ही पता पड़ेगा।