कई वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशी मजबूत बनकर उभरे, भाजपा के लिए मुसीबत बने
उज्जैन।नगर निगम चुनाव को लेकर अब कुछ इस समय बचा है। इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी आमने - सामने हे।भारतीय जनता पार्टी केंद्र से लेकर नगर सरकार तक सत्ता में बैठी होने की वजह से उसे कई परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। कल की आधे घंटे की बारिश ने नगर निगम की सारी पूरी तरह पोल खोल कर रख दी है। इसी तरह साफ सफाई को लेकर भी भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों प्रत्याशियों को भी लोगों की काफी खरी-खोटी सुनने को मिल रही है। टाटा कंपनी ने जगह जगह खोदे गए गड्ढे भी उसकी मुसीबत बन गए। ऐसे में चुनाव नतीजे इन समस्याओं का प्रभाव कितना पड़ेगा यह चुनावी नतीजों में सामने आएगा।
इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी कई वार्डो में अपने बागी प्रत्याशियों की वजह से भी बुरी तरह जूझ रही है जूझ रही है पूर्व पार्षद और प्रभावी नेता के रूप में अपनी छवि बनाने वाली योगेश्वरी राठौर इन दिनों वार्ड क्रमांक 25 में बड़ी मुसीबत में फंस गई है यहां पर कांग्रेस ने क्षेत्र के नामी वकील शंकर सिंह ठाकुर की पुत्री सोनिया सिंह को टिकट दिया है। इसके अलावा निर्दलीय प्रत्याशी सीताबाई बेस भी चुनाव मैदान में आ डटी है। प्रारंभ में माना जा रहा था यह सीट योगेश्वरी ठाकुर राठौर आसानी से फतह हासिल कर लेगी परंतु जैसे जैसे दिन बीतते गए मुकाबला तिकोना होता चला गया क्योंकि सीताबाई बेस का पुत्र संटू का अच्छा खासा प्रभाव है। इस समाज का वोट बैंक हमेशा से भारतीय जनता पार्टी समर्थित रहा है। इस वजह से यह सीट भारतीय जनता पार्टी और निर्दलीय के कारण कही कांग्रेस के खाते में ना चली जाए, इसका डर भारतीय जनता पार्टी को बुरी तरह सता रहा है।
वार्ड 24 में इस बार कांग्रेस ने बहुत ही समझदारी से काम लिया है। यहां से पार्टी ने विजयसिंह यादव को चुनाव मैदान में उतारा है। वह क्षेत्र में काफी लोकप्रिय है। और पिछले चुनाव में भी निर्दलीय खड़े होकर उन्होंने अच्छी संख्या में मत प्राप्त किए थे। यहां कई स्थानीय यहां कई स्थानीय है भारतीय जनता पार्टी की ओर से दावेदार थे जिसमें अपूर्व देवड़ा सहित और अन्य भी थे परंतु भारतीय जनता पार्टी ने पैसे के दम को देखते हुए एक बाहरी क्षेत्र के सुशील श्रीवास को चुनाव मैदान में उतार दिया है।हालाकि वह काफी मिलनसार है परंतु उनपर बाहरी ठप्पा लगने से स्थानीय स्तर काफी असंतोष देखने को मिल रहा है। कही यह असंतोष भाजपा की नैया को डुबो न दें, इसका खतरा भी जबरदस्त बना हुआ है।
पूर्व पार्षद सुनील कछवाह की पत्नी रूबी कछवाह वार्ड 16 से पार्षद रही है। पिछली बार कांग्रेस ने सुनील कछवाह को टिकिट नही देकर अन्य को टिकट दे दिया था जिसका खामियाजा भी कांग्रेस को भुगतना पड़ा और भारतीय जनता पार्टी के मांगीलाल कड़ेल पहलवान जीत गए। परंतु इस बार महिला सीट होने की वजह से मांगीलाल कड़ेल की पुत्री राखी कड़ेल को टिकट दिया है। यहां मुकाबला बड़ा दिलचस्प हो गया। क्योंकि यह क्षेत्र गरीब मिल मजदूर की बस्ती वाला क्षेत्र है। पिछले चुनावों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रोड शो में मजदूरों को चुनाव बाद भुगतान के आदेश की बात कही थी। परंतु बात आई गई हो गई। अपनी बकाया राशि के लिए मजदूरों ने काफी बड़ा आंदोलन किया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और उनका बकाया पैसा के लिए सरकार को कोर्ट ने आदेश दिया यह आदेश को दिए भी दो वर्ष से अधिक हो गया है परंतु आज तक मजदूर परिवारों के जेब में पैसा नहीं आ पाया है। इस वजह से मजदूरों में भाजपा के खिलाफ काफी असंतोष क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। यह असंतोष भाजपा के प्रत्याशी पर उतर गया तो यह सीट खोना बीजेपी के लिए निश्चित ही बड़े सदमे जैसी होगी।
वार्ड 42 भारतीय जनता पार्टी का समर्थित परंपरागत वार्ड रहा है। पट्ठावाद के चक्कर में इस बार यह वार्ड भाजपा का बुरी तरह तहस नहस होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने दो बार पार्षद रहे राधेश्याम वर्मा की पत्नी गोकुल को चुनाव मैदान में उतारने से इंकार कर दिया तो वर्मा ने अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतार दिया, उन्हें भाजपा समर्थित मतों के साथ अन्य मतदाताओं का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। इसी तरह माली समाज भारतीय जनता पार्टी का एक बहुत बड़ा वोट बैंक है।जिसका रामी नगर इलाके में लगभग 800 के लगभग मतदाता निवासरत है। यहां के लखन जागीरदार ने अपनी माताजी प्रेम पता गेहलोत को चुनाव मैदान में उतार दिया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने छोटू पटेल की पत्नी अंजलि पटेल को टिकट दिया गया है भारतीय जनता पार्टी के निर्दलीय उम्मीदवार जनता को बताने में नहीं थक रहे बीजेपी प्रत्याशी नानाखेड़ा की रहने वाली है और यह काम करने कैसे आएगी इसका भी भुगतान भी बीजेपी को उठाना पड़ेगा। हालांकि सांसद अनिल फिरोजिया की इस सीट पर प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है क्योंकि उन्हीं के कहने पर भाजपा ने टिकट दिया है अब कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी की बात कर ली जाए , कांग्रेस ने यहां से नगर के बड़े कारोबारी दिनेश भायल की पत्नी शांति भायल को टिकट दिया है। उनके आने से कांग्रेस को इस वार्ड में पुनर्जीवन का मौका मिल गया है। एक दशक पूर्व चुनाव में शांति भायल खड़ी हुई थी, उन्होंने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी की जमानत जब्त तक करा दी थी। ऐसे में आप सोच सकते हैं कि इस वार्ड का चुनाव नतीजा क्या होगा, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के तीन प्रत्याशी अघोषित रूप से खड़े हैं जबकि कांग्रेस का एकमात्र प्रत्याशी है।